नवंबर 03, 2026

writingDetail.created_by
By: जसवंत कौर कंग बैंस

तेज़ हवा दी गती

मैं उह हवा दी तेज़ गती बणां,

जो चुफेरिआं नूं

गुलाबी रंग देवे।

सूरज दी किरन तों लै के जो,

उजालिआं दी 

सभ नूं उमंग देवे।

आपणे ही सभ्भिआचार विच्चों,

रिशते निभाउण दा वी,

सुंदर ढंग देवे।

निज्ज तों उच्ची गल्ल करन लई,

सखीआं सहेलीआं दा,

सभ नूं संग देवे।

आपणी ही विरासत विच्चों लिआ,

पिआर निभाउण दा,

साथ बैंस-कंग देवे।

***